परिचय - गंगा स्वच्छता अभियान

गंगा स्वच्छता अभियान

स्पर्श गंगा अभियान

पर्यावरण प्रदूषण एक ग्लोबल समस्या बनकर मानव समाज के सामने चुनौती के रुप में खड़ी है। विकास और पर्यावरण के बीच एक संतुलन बनना आज की सबसे बड़ी मांग है। भारत एक विकासशील देश होने के कारण इस समस्या से अछूता नहीं है। समय के साथ जो प्रदेश चैतन्य है, उन्होंने इस समस्या का हल ढूंढना शुरु कर दिया है। उन सब में अग्रणी राज्य है देवभूमि उत्तराखण्ड।

मध्य हिमालय की गोद में बसा यह प्रदेश सजग है, जागरूक है और चैतन्य है। वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण के प्रति शायद उत्तराखण्ड की जिम्मेदारी इसलिए भी अधिक बनती है क्योंकि इसकी गोद से गंगा अविरल रूप् से बहती है-यही तो है ममतामयी गंगा का मायका।

गंगा हमारी संस्कृति की पहचान है और इसका अस्तित्व सनातनी है। इसकी अविरलता, पवित्रता और इसकी शुद्धता करोड़ों-करोड़ों की आस्था की गंगा जीवनदायिनी होने के साथ-साथ प्रत्येक जलधारा को शुद्ध एवं प्रदूषण मुक्त रखने की हमारी दृढ़ता निरन्तर कम हो रही है।

 

 

इस समस्या के निदान की ओर गढ़वाल विस्वविद्यालय के राष्टीय सेवा योजना प्रकोश्ठ द्वारा उत्तराखण्ड में गंगा और उसकी पावन जलधाराओं को प्रदूषण मुक्त करने के विचार को कार्ययोजना के रूप में क्रियान्वयन करने का प्रयास किया। राष्टीय सेवा येाजना के लगभग 40 हजार छात्रों की युवा शक्ति ने इस सोच को साकार के रूप में तब बदल दिया जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ ने इस भावनात्मक पहल को नाम दिया ‘स्पर्श गंगा‘।

अधिकतर अभियानों में शोर ज्यादा होता है, रैलियाँ होती हैं जुलूस निकाले जाते हैं पर इस अभियान में गंगा के वेग की तरह युवा शक्ति के साथ उन चालीस हजार छात्रों का सहयोग रचनात्मक, सकारात्मक एवं प्रायोगिक था।

ऋषिकेश में राष्टीय सेवा योजना के छात्रों, एव0सी0सी0 के छात्रों, स्थानीय लोगों, संस्थाओं और गंगा सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण समिति ने बढ़-चढ़ कर इस अभियान में भागीदारी की। इसके साथ ही गढ़वाल की अन्य नदियों व जलधाराओं को भी स्वच्छ और प्रदूषण रहित बनाने का अभियान भी युवा शक्ति द्वारा, मुख्यमंत्री के संरक्षण में शुरु हो गया। इस भागीरथ प्रयास के कारण डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ ने 17 दिसम्बर को गंगा स्वच्छता दिवस के रूप में बनाने की घोषणा की।

गंगा स्वच्छता अभियान
 
गंगा स्वच्छता अभियान

 

बौद्ध गुरू दलाईलामा, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, योग गुरू रामदेव, पर्यावरणविद् सुन्दर लाल बहुगुणा और स्वामी चिदानन्द जैसे कई गणमान्य साधु, संत, राजनेता व धर्मनेता सभी इस अभियान से प्रभावित नजर आते हैं। उनका प्रभाव आम जनता में स्पर्श गंगा अभियान को बढ़ाने में मददगार ही होगा।

17 दिसम्बर,2009 से प्रारम्भ हुए इस गंगा स्वच्छता अभियान ने छः माह की अल्प अवधि में ही लोकप्रियता हासिल कर ली। इस अवधि में यह अभियान ऋशिकेष, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, श्रीनगर एवं पौड़ी जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के साथ-साथ कई दूरस्थ स्थानों में भी चलाया जा रहा है। यह अभियान जन-जन तक पहुँच चुका है।

डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ का दृष्टिकोण है कि ‘‘स्पर्श गंगा‘‘ पूरे भारत में एक अभियान के रूप में चलाया जाय। विशेष रूप से उन प्रेदेशो में जहां से होकर गंगा प्रवाहित होती है। इसी क्रम में डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ जी द्वारा प्रख्यात अभिनेत्री हेमामालिनी जी को इस अभियान का बै्रंड एम्बेसडर बनाये जाने से अभियान को देशभर में न केवल लोकप्रियता मिलेगी वरन् अभियान का रचनात्मक पक्ष भी विस्तृत होगा।